गम का खजाना तेरा भी है मेरा भी,
ये नज़राना तेरा भी है मेरा भी,
अपने गम को गीत बनाके गा लेना,
राग पुराना तेरा भी है मेरा भी,
तू मुझको और मैं तुझको समझाऊं क्या,
दिल दीवाना तेरा भी है मेरा भी,
शहरों शहरों गलियों जिस का चर्चा है,
वो अफ़साना तेरा भी है मेरा भी,
मैखाने की बात ना कर वाइज़ मुझ से,
आना जाना तेरा भी है मेरा भी....
शाहिद कबीर...
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